वूल्फ मेसिंग के चमत्कारी कारनामें

नमस्कार दोस्तों माइंडस्कूल के इस ब्लॉग में एक बार फिर अपका स्वागत है।

क्या एक इंसान अपनी धारणा से लोगों के धारणा को बदल सकता है ?

क्या एक इंसान जो वस्तु है ही नहीं उसे लोगों को उस वस्तु को देखने के लिए मजबुुर कर सकता है?

क्या एक इंसान कुछ ऐसा कर सकता है की वो जिस व्यक्ति का रूप धारण करना चाहता है ये सोचने मात्र से लोगों को उसमें वही व्यक्ति दिखने लगे ?

दोस्तों आज का ब्लॉग काफी मजेदार और आश्चर्य से भरा हुआ है और शायद आपको इन बातों पे यकीन भी न हो पर ये बिल्कुल सच्ची घटना है।

आज मैं बात करने वाला हूं माइंड के एक उच्च स्तर के विषय में जहां चमत्कार संभव है। ऐसी ऐसी घटनाओं को आप अंजाम दे सकते हैं जो शायद लोगों को यकीन न हो। और उस प्रोसेस का नाम है #सायकिक  पॉवर।

आज मैं बात करने जा रहा हूं - वूल्फ मैसिंग के विषय में।

1910 में जर्मनी की एक ट्रेन में एक पन्‍द्रह-सोलह वर्ष का युवक बैंच के नीचे छिपा हुआ था। उसके पास टिकट नहीं था। वह घर से भाग खड़ा हुआ है। उसके पास पैसा भी नहीं है। आगे चलकर बहुत बड़ा आदमी हुआ और उसके बड़े अद्भुत परिणाम हुए, और स्टैलिन और आइंस्टीन और गांधी सब उससे मिलकर बहुत आनंदित हुए। उस आदमी का बाद में नाम हुआ—वुल्फ मैसिंग। उस दिन तो उसे कोई नहीं जानता था, 1910 में।

वुल्फ मैसिंग ने अपनी आत्‍म कथा में लिखा है। कि उस दिन मेरी जिंदगी बदल गई। उस ट्रेन में नीचे के फर्श पर छिपा हुआ पडा था बिना टिकट के कारण। मैसिंग ने लिखा कि वे शब्‍द मुझे कभी नहीं भूलते— टिकट चेकर का कमरे में प्रवेश, उसके जूतों की आवाज और मेरी श्वास का ठहर जाना और मेरी घबराहट और पसीने का छूट जाना, ठंडी सुबह, और फिर उसका मेरे पास आकर पूछना—यंग मैन, यौर टिकट?

मैसिंग के पास तो टिकट नहीं था। लेकिन अचानक पास में पडा हुआ एक कागज का टुकडा— अख़बार का रद्दी टुकडा मैसिंग ने हाथ में उठा लिया। आँख बंद की और संकल्‍प किया कि यह टिकट है, और उसे उठाकर टिकट चेकर को दे दिया। और मन में सोचा कि है भगवान, है परमात्‍मा, उसे टिकट दिखाई पड़ जाये। टिकट चेकर ने उस कागज को पंक्चर किया, टिकट वापिस लौटायी और कहा— व्‍हेन यू हैव गाट दि टिकट, व्‍हाई यू आर लाइंग अंडर दि सीट? पागल हो, जब टिकट तुम्‍हारे पास है तो नीचे क्‍यों पड़े हो। मैसिंग को खुद भी भरोसा नहीं आया। लेकिन इस घटना ने उसकी पूरी जिंदगी को बदल दिया।


मैसिंग की परीक्षा दुनिया में बड़े-बड़े लोगों न ली। 1940 में एक नाटक के मंच पर जहां वह अपना प्रयोग दिखला रहा था— लोगों में विचार संक्रमित करने का— अचानक पुलिस ने आकर मंच का पर्दा गिरा दिया और लोगों से कहां कि वह कार्यक्रम समाप्‍त हो गया। क्‍योंकि मैसिंग गिरफ्तार कर लिया गया है। मैसिंग को तत्‍काल बंद गाड़ी में डाल कर क्रेमलिन ले जाया गया और स्टैलिन के सामने मौजूद किया गया। स्टैलिन ने कहा—मैं मान नहीं सकता कि किसी व्‍यक्‍ति को दूसरे कि धारण को सिर्फ आंतरिक धारणा से प्रभावित किया जा सकता है। 

मैसिंग ने कहा— आप जैसा भी चाहें। स्टैलिन ने कहा कि कल दो बजे तक तुम यहां बंद हो। दो बजे आदमी तुम्‍हें ले जाएंगे मॉस्को के बड़े बैक में। तुम क्लर्क को एक लाख रूपया सिर्फ धारणा के द्वारा निकलवा कर ले आओ।

पूरा बैंक मिलिट्री से घेरा हुआ था। दो आदमी पिस्‍तौलें लिए हुए मैसिंग के पीछे, ठीक दो बजे उसे बैंक में ले गये। उस कुछ पता नहीं था कि किस काउंटर पर उसे ले जाया जाएगा। जाकर ट्रैज़रर के सामने उसे खड़ा कर दिया, और उसने एक कोरा कागज उन दो आदमियों के सामने निकाला। कोरे कागज को दो क्षण देखा। ट्रैज़रर को दिया, और एक लाख रुबल। ट्रैज़रर ने कई बार उस कागज को देखा,चश्‍मा लगाया, वापस गौर से देखा और फिर एक लाख, एक लाख रुबल निकालकर मैसिंग को दे दिया। मैसिंग ने बैग में वे पैसे अंदर रखे। स्टैलिन को जाकर रूपये दे दिये। स्टैलिन को बहुत हैरानी हुई।

वापस मैसिंग लौटा। जाकर क्‍लर्क के हाथ में वह रूपये वापस दिये और कहा— मेरा कागज वापस लौटा दो। जब क्लर्क ने वापस कागज देखा तो वह खाली था। जब क्‍लर्क ने वह खाली कागज देखा तो उसे हार्ट अटेक का दौरा पड़ गया और वह वहीं नीचे गिर पडा। वह बेहोश हो गया। उसकी समझ के बाहर हो गयी बात, कि क्‍या हुआ।

दोस्तों आज अपने जाना की मानव मन सच में अद्भुत चमत्कारों से भरा पड़ा है। बस जरूरत है हमें गहनता के साथ इसकी छोटी से छोटी बारीकियों व कार्यप्रणाली को समझने की।

दोस्तों आज का ब्लॉग कैसा लगा ? कमेंट कर के जरूर बताएं।

मानव मन की और चमत्कारों के बारे में जाने के लिए मेरे ब्लॉग को जरूर पढ़ें। आपका बहुत बहुत धन्यवाद।

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